This story is part of the Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti series
पिछले कुछ महीनों से मेरी चुदाई हुई ही नहीं थी। मेरे पति विदेश गए हुए थे। अजित से ब्रेक अप हो गया था।
शायद इसलिए मेरा छिद्र और भी छोटा दिख रहा था। अब मुझे भरोसा था की योग से बार बार चुदवाकर मेरा छिद्र चोदने लायक तो हो ही जाएगा।
खैर, मैंने योग के लण्ड को अपनी चूत की पंखुड़ियों पर रगड़ा जिससे उसका लण्ड चिकनाहट से लिप्त हो जाए। अच्छी तरह स्निग्ध करने क बाद मैंने एक हाथ की मेरी उँगलियों से मेरी चूत की दोनों पंखुड़ियाँ खोली और दूसरे हाथ से योग का लण्ड मेरी उँगलियों में पकड़ कर मेरे छिद्र में धीरे से घुसेड़ा।उसके लण्ड के थोड़े से प्रवेश होने पर ही मुझे रोमांच हो उठा और मेरे रोंगटे खड़े हो गए। अब यह चिंता थी की आगे क्या होगा। क्या योग का मोटा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में घुस पायेगा? और अगर घुस भी पाया तो मुझे कितना दर्द देगा।
मुझे डर ज्यादा था, क्यूंकि योग का लण्ड देखते ही मेरी हालत खराब हो जाती थी। ऐसा लगता था योग की दोनों झांघों के बिच किसीने रबर का एक सॉलिड पाइप घुसेड़ दिया हो।
मैं जानती थी की ऐसे कोई दिक्कत नहीं होती …