This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
राहुल ने मेरी गांड मार दी थी और मैंने आखिरी बाधा पार कर ली थी। मैं जल्दी से अपने कपड़े उठाये बिना उसकी तरफ मुड़े बाथरूम को भागी। मैंने अपनी दूसरी परीक्षा पास कर ली थी। मैं इसी में खुश थी कि मैंने राहुल को अपने मम्मे और आगे से पूरी चूत नहीं दिखाई थी। हालांकि उसने कुछ पलो के लिए मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया था पर उसे मैंने अपनी चूत पूरी नहीं चोदने दी।
मैंने अपनी साफ़ सफाई कर कपड़े पहन लिए और बाहर निकल बैडरूम में आयी। वो वहां नहीं था। मैं हॉल में आयी तो वो वहां के बाथरूम से बाहर आया। वो अंदर बेडरूम में गया और आते वक़्त मेरे पहले वाले कपड़े ले आया जो दो दिन पहले मैंने यहाँ छोड़ दिए थे।
राहुल: “तुम्हे ऑफिस के लिए ये कपड़े पहनने थे ना, ये लो . इसमें तुम्हारी ब्रा और पैंटी भी हैं”
मैंने वो कपड़े उससे लिए। उसकी इतनी बेबाक बात पर मुझे शर्म आ गयी, उसने भले ही मुझे चोदा था पर इतना अधिकार तो नहीं था कि इस तरह बात मुँह पर करें। मैं उससे कपड़े लगभग छीनते हुए बैडरूम में भागी।
मैंने …