This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
हेल्लो दोस्तों, अब आगे की कहानी पढ़िए!
कुछ देर बाद कालिया ने पलंग पर लेटी हुई सिम्मी की चूत में अपनी दो उंगलियां डालीं और उन्हें सिम्मी की चूत में से अंदर बाहर कर उसे उँगलियों से चोदने लगा।
कालिया उँगलियों को इतनी फुर्ती से अंदर बाहर करने लगा की मारे कामुकता के सिम्मी की हालत खराब होने लगी। सिम्मी से यह बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था। सिम्मी की चूत में से पानी बह रहा था जो सिम्मी की कामुक हालात बयान कर रहा था।
सिम्मी मारे उन्माद के कालिया का हाथ पकड़ कर उसे “कालिया बस करो अब, मुझसे रहा नहीं जा रहा। जल्दी अपना लण्ड डालो अंदर। जल्दी करो प्लीज। तुम मुझे चोदना चाहते थे ना? तो अब चोदो मुझे।”
कालिया ने यह सुनकर सिम्मी की दोनों चूँचियाँ दोनों हाथों में पकड़ीं और उन्हें जोर जोर से मसलते हुए बोलने लगा, “साली, मुझे अपने पास फटकने नहीं दे रही थी। जैसे ही मेरा लण्ड छुआ तो कैसी लाइन पर आ गयी? अब देख मैं तुझे कैसे चोदता हूँ। पहले तो मैंने तुझे अपना माल निकालने के लिए चोदा था। पर इस बार मैं तुझे बड़े प्यार से देर तक …