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पड़ोसन बनी दुल्हन-59

This story is part of the Padosan bani dulhan series जिनको मैं दिल से पूजती हूँ जो दिल में मेरे बसता हैयौवन क्या, जाँ कुर्बां उस पर, यौवन का सौदा सस्ता है।यह बदन मेरा अर्पण उसको जितना वह चाहे चोदे मुझेकुर्बां मेरा हर एक अंग जैसे चाहे वह रोंदे मुझे।। इतनी मैं पागल हूँ उससे चुदते मरना मंजूर मुझेचूत मेरी चाहे लण्ड उसका ना करना उससे दूर मुझे।चाहे प्यार करे या दुत्कारे वह भले मुझे रंडी मानेबस दिल भर कर चोदे मुझ को पहचाने या ना पहचाने। चाहे मेरे मुंह को चोदे चाहे चाटे चूत का पानीना कोई शिकायत करूंगी मैं चाहे कर जितनी मनमानी।तेरे बच्चों की मां बन जाऊं बस यही गुज़ारिश है मेरीमुझे प्यार करे या ठुकराए रखना जैसे मर्जी तेरी।। मेरे जेठजी से चुदवाने का पागलपन मेरे सिर पर सवार हो चूका था। जिसके बारे में पहले मैं सोच भी नहीं सकती थी वह करने के लिए मैं अब पागल हो रही थी। मेरे जेठजी कभी ना कभी तो यह जान ही जाएंगे की मैंने उनसे चुदवाया था। मुझे पता नहीं था की जेठजी मेरे बारे में इसके बाद क्या सोचेंगे। जिस बात के मैं सपने देखती रहती थी, अब हकीकत में वह होने वाला था। मैं मेरे जेठजी से चुदने वाली ही थी। मैं मेरे जेठजी की तगड़ी चुदाई करने की क्षमता के बारे में भलीभाँति जानती थी। माया ने सब कुछ तो बता दिया था मुझे। मैं जानती थी की उनके लण्ड में वह दम था की वह अगर ठान ले तो ऐसी चुदाई …

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