This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
जहां में हाँ अजी ऐसे कई नादान होते हैं।वहाँ ले जाते हैं क़श्ती जहां तूफ़ान होते हैं।
आरती की नैया तूफ़ान में फँसने वाली थी। माना की आरती का पति आरती के साथ था जो मांझी या नाविक बन कर वह तूफ़ान में जा रही नैया को किनारे ले जाने का मादा रखता था। पर आरती और उसके पति कुछ ऐसा करने जा रहे थे, जो अक्सर करने की हिम्मत कई विवाहिता युगल में नहीं होती।
एक तरीके से कहा जाए तो आरती और अर्जुन की जोड़ी वास्तव में भी एक आदर्श पति पत्नी की जोड़ी कही जा सकती है जो सामान्य पति पत्नी का किरदार निभाते हुए भी अपने जीवन की नैया को सम्भोग की नयी ऊँची लहरों की सुनामी में ले जाने की कामना रखते थे
मैंने कहा, “मैं तुम्हारे पति का या रमेश का नहीं, तुम्हारा सपोर्ट कर रहा हूँ। अगर तुम्हें रमेश बिलकुल कोई ख़ास अच्छा नहीं लगता और अगर तुम सच्चे दिल से रमेश से कोई वास्ता रखना नहीं चाहती तो बताओ, मैं इसी वक्त तुम्हें रमेश से सारे नाते रिश्ते तोड़ने के लिए कह दूंगा। बोलो, अब दिल खोलने का और सच बोलने का समय आ गया है।”
इस बार आरती ने तपाक से …