This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
जस्सूजी हालांकि सुनीता को पहले भी चोद चुके थे पर सुनीता के लिए हर बार जब भी जस्सूजी का लण्ड उसकी चूत में दाखिल होता था तो पता नहीं क्यों, सुनीता के पुरे बदन में जैसे एक अजीब सी तीखी मीठी सिहरन फ़ैल जाती थी। अपने पति से चुदवाना भी सुनीता को काफी आनंद देता था पर जस्सूजी के लण्ड की बात ही कुछ और थी।
शायद यह जस्सूजी के प्यार करने के तरीके से या फिर जस्सूजी के गठीले बदन के अनुभव से या फिर उनके भारी मोटे और लम्बे लण्ड से हो; पर जस्सूजी का लण्ड सुनीता की चूत में कुछ और ही उन्माद की लहर फैला देता था जैसे सुनीता के जहन मन उन्माद को कोई सैलाब आया हो।
जस्सूजी ने जैसे धीरे धीरे अपना लण्ड सुनीता की चूत की सुरंग में पेलना शुरू किया की सुनीता बार बार उन्मादित रोमांच से सिहरने लगी। रोमांच के मारे उसके बदन के सारे बाल जैसे खड़े हो गए। उसकी चूत में अजीब सी सिहरन और फड़कन शुरू हो गयी।
जैसे ही चूत की सुरंग की त्वचा फड़कती थी की वह जस्सूजी के लण्ड को एक वाइस की तरह जकड लेती थी। जिसके कारण जस्सूजी को एक अजीब अनूठा अहसास काअनुभव होता था।
जस्सूजी ने महसूस किया की दूसरी बार सुनीता जस्सूजी के लण्ड को अंदर लेते हुए पहले की तरह हिचकिचा नहीं रही थी। वह एक अनुभवी प्रेमिका साथी की तरह चुदाई करवाने …