This story is part of the Padosan bani dulhan series
मैंने सेठी साहब को भाभी को चोदना शुरू करने से रोका। मेरे पास इसी काम के लिए इस्तेमाल हो ऐसे तेल की एक बोतल थी। मैं उसे बड़ी चुप्पी से याद रख कर अपने साथ मायके ले आयी थी, क्यूंकि मुझे डर था की कहीं सेठी साहब का मन करे मेरी गाँड़ मारने का तो मैं उन्हें मना कर नहीं पाउंगी और तब यह आयल बड़ा काम आएगा।
ज्यादातर तो वह तेल जब गाँड़ मारते हैं तब इस्तेमाल करते हैं। मैंने उसमें उंगली डालकर काफी तेल निकाल कर सेठी साहब के लण्ड पर लपेटा और भाभी की चूत में भी जाने दिया। वह तेल सुरक्षित था ऐसे इस्तेमाल के लिए। जब सेठी साहब का लण्ड बहुत बढ़िया तरीके से चिकना हो गया तब मैंने सेठी साहब को इशारा किया की वह भाभी की चूत में लण्ड पेलना शुरू कर सकते हैं।
मैं सेठी साहब का विशालकाय लण्ड भाभी की छोटी सी चूत में दाखिल होते हुए देखना चाहती थी। मैं जानती थी यह काफी कठिन होगा। पर चुदाई तो होनी ही थी, उस लण्ड को उस चूत में घुसना ही था।
सेठी साहब धक्का मारा। सेठी साहब का लण्ड चिकनाहट के कारण थोड़ा घुसा। करीब इंच घुसा ही होगा की मुझे भाभी की चीख सुनाई दी। खैर यह तो अपेक्षित था। पर इतनी जल्दी नहीं। मैं भी जानती थी की भाभी काफी चिल्लायेगी। हो सकता है वह दर्द के मारे सेठी …