फ्री में चुदाई की कहानी में होली वाले दिन कॉलोनी के सारे जवान लड़के लड़कियों ने मिल कर होली खेली, मस्ती की, फिर खुली चुदाई का खेल खेला.
हैलो फ्रेंड्स मैं फेहमिना अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ पुन: हाजिर हूँ.
पिछले भागबहन के साथ मूत का खेलमें आपने पढ़ा था कि मैंने और आयशा ने लेस्बियन सेक्स का मजा लिया और सो गई थीं.
अब आगे फ्री में चुदाई की कहानी:
अगले दिन हमारी नींद गेट पर डोरबेल की आवाज से खुली. मैंने तुरंत कपड़े पहने और आयशा को उठाकर उसे भी कपड़े पहनने को बोला.उसने कपड़े पहन लिए.
फिर मैंने जैसे ही गेट खोला तो देखा मेरे दोस्त गेट पर थे.सबने मुझे रंग लगाया और होली विश की.मैंने भी सबको रंग लगाया.
तब मैंने महसूस किया कि जितने भी लड़के थे, वो मुझे मसल मसल कर रंग लगा रहे थे.मैं समझ गयी कि अभी थोड़ी देर में मुझे टांगें फैलाकर इनके लंड की नीचे लेटना है.मैंने भी कोई विरोध नहीं किया.
अमित ने तो रंग लगाने के चक्कर में मेरे बूब्स भी दबा दिए, जब मैंने उसकी ओर देखा तो वो मुस्कुरा दिया.
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