जिस दिन मैं आया था, उसी दिन बहू को ब्रा निक्कर में देखा. मेरा तो तभी लंड खड़ा हो गया था. फिर रात में अपने बेटे और बहू की चुदाई देखी. लगता है मेरा बेटा बहू की सही से चुदाई नहीं करता.
कहानी का पिछला भाग: शहर की चुदक्कड़ बहू-3
कामवाली रानी से मेरी बहू की चूत चुदाई की बातें सुन के मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था.वो बोली- लगता है आप भी अपनी बहू को चोदना चाहते हो? बाबूजी आपका लंड तो बहू के नाम से खड़ा हो जाता है.मैंने कहा- अगर मेरी बहू इतनी बड़ी चुदककड़ है तो उसे चोदने में क्या हर्ज है.रानी बोली- बाबूजी, मुझे लगता है वो तो आसानी से मान भी जाएगी. उसे चुदाई का बहुत शौक है. कभी उसके कमरे में नहीं गए आप?“नहीं रानी, वैसे उसके कमरे में ऐसा क्या है?”
रानी मेरा हाथ पकड़ के मुझे बहू के कमरे में ले गयी. वहाँ उसने एक दराज खोला. उसमें एक बड़ा सा डिलडो था. मैंने लाइफ में डिलडो पहली बार देखा था- ये क्या है रानी?वो बोली- बाबूजी, ये नकली लंड है जिसे आपकी बहू हमेशा अपनी चूत में लेती है. यकीन ना हो तो दोपहर के टाइम देखना.
वो नकली लंड देखकर और रानी की ये सारी बातें सुन के मुझे यकीन हो गया मेरी …