This story is part of the Mere Pati Ko Meri Khuli Chunoti series
अजित ने मुझे एक बाँह मेरी पीठ के निचे और दूसरी बाँह मेरे घुटनों के पीछे लगा कर बड़ी आसानी से पूरी तरह अपनी बाँहों में ऊपर उठा लिया और मुझे उठा कर बैडरूम में ले गया और बिस्तर पर धीरे से रख दिया.
वो बोला, “मैं तुम्हें आज एक रंडी की तरह चोदुँगा। तु साली राँड़ बड़े नखरे कर रही थी और यह दिखाने की कोशिश कर रही थी की तू बड़ी सभ्य और ऊँचे समाज की है। पर मैं जानता था की तेरी चूत मेरे मोटे लण्ड के लिये बड़ी मचल रही है। आज मैं तुझे न सिर्फ चोदुँगा बल्कि चोद चोद कर तेरी यह छोटी सी चूत का भोसड़ा बना दूंगा।”
किसी और जगह कुछ अलग परिस्थिति में ऐसी भाषा सुनकर शायद मैं गुस्से से तिलमिला उठती। पर अजित की ऐसी गन्दी गालियाँ सुनकर मेरी काम वासना और भड़क उठी।
मैंने भी ऐसी ही भाषा में जवाब देते हुए अजित से कहा, “ऐ भड़वे! तुझमें अगर दमखम है तो दिखा मुझे अपने लण्ड का जोश। तुम अपने आप को क्या समझते हो? क्या तुम मुझे आसानी से चोदोगे और मैं तुमसे चुदवाउंगी? अरे जा रे! मुझे चोदने के सपने छोड़ दे।”
मैं बार बार अजित को चोदना, लण्ड ऐसे शब्द उपयोग करके यह इशारा देना चाहती थी की मैं मना तो करती रहूंगी पर मेरी ना में भी मेरी हाँ है। अजित मुझ पर जबरदस्ती करना नहीं चाहता था। वह मुझे अच्छा लगा। पर मैं चाहती थी की वह उस रात मुझे चोदे।
मैंने उसे चुनौती देते हुए कहा, “अरे तुम में दम ही कहाँ है? चोदने की बात तो दूर, अगर दम है तो मुझे पकड़ कर तो दिखाओ। तुम सिर्फ बातें करने वालों में से हो। चोदने …