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पड़ोसन बनी दुल्हन-17

This story is part of the Padosan bani dulhan series मैंने झुक कर सुषमा की चूत को चूमते हुए कहा, “सुषमा तुम्हारी बात बिलकुल सही है। प्यार में सम्मान अन्तर्निहित होता है। सम्मान ख़ास रूप से देने की जरुरत नहीं होती। मुझे तुम्हारी चूत और तुम्हारे स्तन मंडल को खूब चूमना है और प्यार जताना है।” अनायास ही सुषमा का हाथ मेरे पाजामे के नाड़े पर जा पहुंचा। वह चाहती थी की मैं भी अनावश्यक आवरणों को त्याग कर अपने प्राकृतिक अवस्था में प्रस्तुत होऊं। शायद वह मेरे लण्ड को सहलाना चाह रही थी। मैंने फुर्ती से पाजामे का नाडा खोल कर पजामा और अंदर की निक्कर निकाल फेंकी। मेरे पाजामे और निक्कर के हटते ही बंधन में जकड़ा हुआ मेरा लण्ड सख्ती से खड़ा हो गया। मेरा लण्ड का साइज शायद सेठी साहब के मुकाबले उन्नीस हो सकता है पर सुषमा के चेहरे से मुझे ऐसा कुछ लगा नहीं। सुषमा ने मेरे लण्ड के आझाद होते ही अपनी …

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