This story is part of the साली की समस्या series
फिर धीरे से मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी। वो थोड़ा चिल्लाई, पर मान गई। फिर दोनों उंगलिया अपना काम कर रही थी।
मैं अंदर-बाहर करता रहा जिससे उसमें जगह अच्छे से बन जाए, और मेरा लंड अंदर चला जाए। अब वो तैयार थी। फिर मैंने लंड को तयार किया। थोड़ा सा उसे तेल लगा दिया, लेकिन कंडोम नहीं चढ़ाया। फिर धीरे से मैंने उसे घोड़ी बनाया, और बस अंदर एक धक्का मारा।
वो चिल्लाई, पर मैं नहीं माना। धीरे-धीरे उसे मना कर मैंने लंड पूरा अंदर कर दिया। इससे वो गुस्सा हो गई और उसने झटपटा कर लंड निकाल दिया। फिर दर्द के मारे बेचारी रोने लगी। मैंने उसे गले लगा लिया और फिर उसे प्यार से मनाया।
वो फिर कहने लगी: जीजू आगे से कर लो जितना करना है। पीछे से ना करो, दर्द होता है।
मैंने उसे समझाया और प्यार दिया। थोड़ा प्यार पाकर वो मान गई और पलट कर डोगी बन गई। मैंने प्यार से फिर एक बार उंगली डाली उसकी गांड में, और अब उसकी गांड थोड़ा पहले से चौड़ी लगी रही थी। मैंने मौका देखा, और फिरसे लंड पेल दिया बस। इस बार उसे उतना दर्द नहीं हुआ, तो मैंने अंदर-बाहर करना चालू किया।
अब बस वो चार्ज हो गयी थी, और बोलने लगी: जीजू अहह अहहा उहह, जीजू निकाल लो।
पर मैं नहीं माना। मैं हमला करता रहा, और वो अहह उहह उहह आहह करती रही। इस इस बार वो तबियत से ठुकी, और खुद मेरे लंड …