मैं बहू के बालों में हाथ फेर रहा था और वो मेरा लंड बड़े मज़े से चूस रही थी. मेरी बहू सच में बहुत वाइल्ड है और चुदक्कड़ भी! वो बिल्कुल भी टाइम नहीं गंवा रही थी.
कहानी का पिछला भाग: शहर की चुदक्कड़ बहू-6
मैंने कपड़े उतारे और एक पजामा और टी शर्ट पहन के बहू के रूम में गया.बहू अभी भी पार्टी वाली ड्रेस में लेटी हुई थी.मैंने कहा- बहू, अभी कपड़े नहीं बदले?बहू बोली- अभी चेंज करती हूँ.बहू और मैं एक दूसरे के सामने खड़े थे मगर पता नहीं क्यों मैं हिम्मत नहीं कर पा रहा था.
इस बार बहू ने मेरा मुँह पकड़ के मुझे एक किस कर दिया. मगर ये किस बस 2 सेकंड का था. मगर मेरे लिए ये सिग्नल था. मैंने बहू की कमर पकड़ी और उसे अलमारी से लगा दिया और हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे.
मेरी बहू मेरे होंठों को चूस रही थी और मैं उसके होंठों का रसपान कर रहा था. बहू की जीभ मेरे मुँह के अंदर मेरी जीभ के साथ खेल रही थी.
हम दोनों को किस करते हुए 2 मिनट हुए थे तभी बहू ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी और फिर से किस करने लगी. मैं बहू की गांड को दबाने लगा और उसे किस करने लगा.बहू की गांड दबाते दबाते मैंने उसकी ड्रेस ऊपर कर दी. बहू ने पेंटी पहन रखी थी जिसकी सिर्फ डोरी ही थी जो उसकी गांड में घुसी थी.बहू ने बाद में बताया कि इसे थांग्स बोलते हैं.
बहू मेरे पेट पर बैठ गयी और उसने अपनी ड्रेस उतार दी. अब मेरी बहू सिर्फ पेंटी में थी जो सिर्फ उसकी चूत को छुपा रही थी.
बहू ने मेरे हाथ पकड़ के अपने बूब्स पर रख दिए और मैं उसके बूब्स जोर जोर से दबाने लगा, उसके बूब्स के निप्पल को खींचने लगा. बहू आँखें बंद किये सब का मज़ा ले रही थी. मैं अपने हाथ उसके पूरे पेट पर घुमा …