This story is part of the Sanjha Bistar, Sanjhi Biwiyan series
राज के साथ रानी अपने कपडे बदल कर सफ़ेद नाइट गाउन पहन कर आ रही थी। रानी का गाउन महिम कॉटन का था।
शायद राज ने भी रानी को अन्तर्वस्त्र (यानी पेंटी और ब्रा) पहनने से रोका था जिसके कारण हवा का एक झोंका और पीछे से आती प्रकाश की किरणें रानी के गाउन में से उसके कमसिन नंगे बदन की आकृति की साफ़ साफ़ झांकी दे रही थीं।
दोनों टांगो को एक दूसरे से दबाती हुई चलती रानी दो सुआकार जाँघों के बिच सिकुड़ी हुई अपनी खूबसूरत चूत को दूसरों की नजरों से छुपाने का नाकाम प्रयास कर रही थी।
बड़ी ही सहमी सहमी धीरी चाल से चलती हुई, रानी सफ़ेद परी के सामान दिख रही थी। रानी की चाल से थिरकते हुए उसके उन्नत उरोज और मटकती हुई उस की गाँड़ देखते ही बनती थी।
कुमुद ने देखा की बड़ी मुश्किल से उसके पति कमल ने अपनी नजर रानी के कमसिन बदन से हटाई।
कुमुद ने सोचा बेचारे उसके पति का क्या दोष? ऐसी खूबसूरत और सेक्सी स्त्री को देखकर कुमुद का खुद का मन भी तो रानी को बाहों में लेने को मचल रहा था।
कमल और कुमुद के पहुँचते ही राज ने कहा, “भैया, आज हम चारों मिलकर खुल्लम खुल्ला बाते करते हैं और सारी …