This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनीता ने जस्सूजी से एक वचन माँगते हुए कहा, “जस्सूजी मैं और आप दोनों, आपकी पत्नी ज्योतिजी को और मेरे पति सुनील को हमारे बिच हुई प्रेम क्रीड़ा के बारे में कुछ भी नहीं बताएँगे। वैसे तो उनसे छुपाने वाली ऐसी कोई बात तो हुई ही नहीं जिसे छिपाना पड़े पर जो कुछ भी हुआ है उसे भी हम जाहिर नहीं करेंगे…
मैं हमारे बिच हुई प्रेम क्रीड़ा को मेरे पति सुनील और आप की पत्नी ज्योतिजी से छिपा के रखना चाहती हूँ ताकि सही समय पर उन्हें मैं इसे धमाके से पेश करुँगी की दोनों चौंक जाएंगे और तब बड़ा मजा आएगा।”
कर्नल साहब सुनीता की और विस्मय से जब देखने लगे तब सुनीता ने जस्सूजी का हाथ थाम कर कहा, “आप कैसे क्या करना है वह सब मुझ पर छोड़ दीजिये। मैं चाहती हूँ की आपकी पत्नी और मेरी दीदी ज्योतिजी से मेरे पति सुनीलजी का ऐसा धमाकेदार मिलन हो की बस मजा आ जाये!”
सुनीता का आगे बोलते हुए मुंह खिन्नता और निराशा से मुरझा सा गया जब वह बोली, “मेरे कारण मैं आपको चरम पर ले जा कर उस उन्मादपूर्ण सम्भोग का आनंद नहीं दे पायी जहां मेरे साथ मैं आपको ले जाना चाहती थी…
पर मैं चाहती हूँ की वह दोनों हमसे कहीं ज्यादा उस सम्भोग का आनंद लें, उनके सम्भोग …