मैं मार्केटिंग की नौकरी करती थी. टारगेट पूरे ना होने से इंसेंटिव नहीं बनते थे. मैं साथ काम करने वाली लड़की से पूछा तो उसने टारगेट पूरे करने का तरीका बताया.
हाय दोस्तो, मैं आपकी अंजलि एक बार फिर से फ्री सेक्स कहानी पर आपके सामने एक नई कहानी लेकर हाजिर हूँ.
मेरी पिछली सेक्स कहानीमेरी बुर और गांड की सील टूटीको लेकर मुझे आप लोगों के कई ईमेल मिली हैं. मैंने कई मित्रों को रिप्लाई भी किया है. इन मेल्स में मुझसे सभी ने कहा कि एक और नयी कहानी लिखिए, तो मैं एक और नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.
मैं एक मोबाइल होलसेल शॉप में काम करती थी. मोबाइल शॉप का मालिक का नाम धीरज था.
मेरा काम मोबाइल सेल करना था और मैं अपना काम बड़ी मेहनत और लगन से करती थी.
शुरू शुरू में सब ठीक था … फिर मैं सैट हो गई … मतलब अब मैं अपने जॉब का काम समझने लगी थी.
एक दिन मैं अपनी शॉप के मालिक धीरज से बोली कि मेरी सैलरी बढ़ा दी जाए और सेल पर मिलने वाला कमीशन भी.उस बात पर धीरज बोला- ठीक है अंजलि, मैं बढ़ा दूँगा, लेकिन तुझे अपना टार्गेट पूरा करना पड़ेगा.
इस कहानी को सेक्सी आवाज में सुन कर मजा लीजिये.
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