This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
किसी गैर से चुदवाने का जोश दिमाग में छाया है,मुझे चोदने प्रेमी मेरा आज मेरे घर आया है।एक बालम था अब तक मेरा जिसका लण्ड लिया मैंने,अब इस प्रेमी का लुंगी मैं जो मेरे मन भाया है।ब्याह रचाएगा मुझसे दुल्हन उसकी बन जाउंगी,कहता है मेरा प्रेमी की तभी मैं उसको पाउंगी।ब्याह रचाकर पहले तो वह मुझ को खुद से जोड़ेगा,चोद चोद कर फिर मुझको बेहाल बना कर छोड़ेगा।
आरती ने रमेशजी के जीभ अपने मुंह में लेकर उसे चूसते हुए कहा, “रमेशजी मैं भी आपसे मिलकर बहुत ही खुश हूँ। मैं मेरे पति का और ख़ास कर मेरे मुंहबोले पापा का शुक्रिया करती हूँ की मेरे बार बार मना करने पर भी उन्होंने मुझे अपना पूरा जोर लगा कर समझाया और मनाया और मुझे आपसे मिलाया। रमेशजी मैं सच कह रही हूँ की आपका प्यार देख कर मैं भी आपसे प्यार करने लगी हूँ। अभी …