मेरे पिताजी फ़ौज में हैं तो मैं अपने घर में अपनी मम्मी और बहन के साथ रहता था. मैंने उन दोनों की हरकतें देखी, मम्मी तो घर में अपनी वासना का इलाज करती थी.
दोस्तो, मेरा नाम आदित्य है, घर में सब मुझे आदी कहते हैं. मैं 23 साल का नौजवान हूँ. मैं पिछले काफी समय से अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ रहा हूँ. अब कहानी पढ़ता हूँ, तो मुठ भी मारता हूँ.अब आप कहोगे कि इसमें क्या खास बात है. जितने भी पाठक अन्तर्वासना डॉट कॉम पर कहानियां पढ़ते हैं, ज़्यादातर तो हाथ से ही करते हैं, चाहे हो कोई लड़का हो, आदमी हो, लड़की हो औरत हो या कोई बुजुर्ग हो, ये तो एक नॉर्मल सी बात है. मगर मेरी ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो सामान्य नहीं था, जिसने मुझे असामान्य बना दिया.
अब ऐसा क्या हुआ, वो सब मैं आपको बताने जा रहा हूँ, ये शुरुआत की बात है, मगर इसके बाद भी ऐसा बहुत कुछ हुआ था, जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी.
मैं अपनी माँ पिताजी और बड़ी बहन के साथ रहता हूँ. मेरी बहन मुझसे 4 साल बड़ी है. ये बात करीब चार साल पहले तब की है, जब हमने अपना नया घर बनाया था.
पिताजी फौज में थे और अक्सर उनकी पोस्टिंग कहीं बाहर ही रहती थी.
पिताजी ने घर तो बनावा दिया था, मगर उसकी बाउंड्री वाल यानि बाहर की दीवार नहीं बन पाई थी. हमारे घर के पीछे वाला हिस्सा खुला ही था, मगर पीछे घर में कुछ खास नहीं था, सिर्फ एक भैंस बांधी हुई थी.माँ सुबह शाम उसका दूध निकालती थीं. कुछ दूध हम अपने लिए रखते, कुछ बेच देते थे. इससे घर में चार पैसे की आमदनी भी हो जाती थी.
भैंस भी इसलिए रखी थी कि पिताजी सोचते थे कि घर का दूध होगा, तो बच्चे सेहतमंद होंगे. माँ की आदत थी कि एक बार वो सुबह 5 बजे दूध निकालती थीं और एक बार शाम को 5 बजे. शाम को तो …