अब आगे की कहानी – उन्होंने हमारी गांड सटा कर हमें खड़ी कर दिया और हमारे सामने आ गए। सतीश ने मेरे बूब्ज़ बूब्ज़ पर मुंह रख लिया और संजीव ने मम्मी के बूब्ज़ पर। वो हमारे बूब्ज़ के निप्पलों पर जीभ घुमाते हुए हमारे बूब्ज़ को प्यार से चूसने लगे और हम उनके बालों को सहलाने लगीं। कुछ देर बाद दोनों वहशी हो गए और बहुत जोर जोर से हमारे बूब्ज़ को चूसने लगे। हम उनके सिर पकड़ कर अपने अपने बूब्ज़ पर दबाने लगीं।
जितनी बेरहमी से वो हमारे बूब्ज़ चूसते उतना ही हमें ज्यादा मजा आता। जब वो हमारे बूब्ज़ के निप्पलों को दांतों में पकड़ कर जोर से खींच लेते तब हमारे मुंह से अपने-आप मसती भरी आह निकल जाती। कुछ देर बाद उन्होंने हमें घुमा दिया और अब संजीव मेरे बूब्ज़ नोचने लगा और सतीश मम्मी के। ऐसा लग रहा था वो हमारे बूब्ज़ से सारा रस निकाल कर पीना चाहते हों। अब उनका अगला निशाना बना हमारा नाजुक, गोरा और चिकना पेट। वो दोनों घुटनों के बल नीचे बैठ गए और हमारे पेट पर जीभ घुमाकर चाटने लगे।
हम दोनों मां बेटी मचलने लगीं और उनके बालों से खेलने लगीं। वो हमारी गहरी नाभि में जीभ डालकर घुमाते और हम मचलती हुई उनका सिर अपने पेट पर दबा लेतीं। वो अदला-बदली करके हमारे पेट को चूम और मुंह में लेकर चूसते। हम दोनों मस्ती में मचलती हुई अपनी गांड एक दूसरे से रगड़ती हुई उनकी कामुक हरकतों का मजा ले रही थीं। वो दोनों हमारी भरी हुई जांघों को हाथों से सहलाते हुई पेट को …