अब आगे की कहानी – मैंने आज तक तेरे साथ लंड चूत की चुसाई के टाईम खुद पर बहुत काबू रखकर गालियां नहीं दीं कहीं तुझे बुरा न लगे लेकर आज अगर गालियां दूं तो बुरा मत मानना और तू भी दिल खोलकर गालियां दे सकती है मुझे अच्छा लगेगा। हिन्दी चुदाई कहानी सेक्स्स्टोरी
मैंने कहा कोई बात नहीं सर आप जितनी चाहे गालियां निकाल लेना कोई दिक्कत नहीं और अगर मेरा दिल हुआ तो मैं भी निकाल लूंगी। सर खुश हो गए और बोले बहनचोद बातें करती रहेगी तो रात ऐसे ही निकल जाएगी, आजा रंडी मेरे होंठ तेरे होंठों का रस पीने को बेकरार हैं। मैंने अपने होंठों को सय के होंठों के पास कर दिया और कहा ले भड़वे चूस मेरे होंठों को मैं भी तेरे होंठों का रस निचोड़ दूंगी।
सर ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और हाथ नाईटी के ऊपर से मेरे बूब्ज़ पर रख दिए। मैंने एक हाथ सर की गर्दन में डाल लिया और दूसरे हाथ से जींस के ऊपर से सर के लंड को पकड़ लिया। सर मेरे बूब्ज़ दबाते हुए मेरे होंठ चूमने लगे और मैं सर का लंड मसलते हुए होंठों का रसपान करने लगी।
ऐसे सोफे पर बैठे-बैठे घूमना पड़ रहा था और हम दोनों खडे़ हो गए। सर ने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़कर मेरे होंठ चूमने चालू किए और मैंने सर की शर्ट के बटन खोलकर अपने हाथ उनकी छाती पर रख दिए। मैं सर की छाती को हाथों में पकड़कर दबाने लगी तथा उनके निप्पलों को ऊंगली और अंगूठे के बीच दबा कर मसलने लगी। सर ने मेरा नीचे वाला होंठ अपने होंठों में ले लिया और जोर से चूसने लगे तथा मैं सर का ऊपर वाला होंठ चूसने लगी।
धीरे-धीरे हम दोनों का जोश बढ़ने लगा और हम जोरदार चूमा चाटा करने लगे। हम एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर घुमाते हुए मुंह के अंदर का रसपान करने लगे और एक दूसरे की जीभ को खींच कर चूसते। हम एक दूसरे के होंठों को मुंह में भर लेते और बीच-बीच में दांतों से हल्का हल्का काट भी लेते। हम अपनी जीभ बाहर निकाल कर एक दूसरे की जीभ से जीभ टकरा कर चाटते और फिर मुंह में लेकर चूसते।
ऐसे लग रहा था जैसे हम दोनों एक …