शायद पहली बार रंजन ने किसी लड़की के वक्ष छुए थे, तो वो बावरा होकर बहुत देर तक उनको दबाने का ही मजे लेता रहा। उसने मेरे ऊपर के हाथ में फंसा आधा खुला शर्ट और ब्रा भी निकाल दिया और एक बार फिर वक्षो को दबाने का आनद लेने लगा।
मुझसे इतना इंतज़ार नहीं हुआ। मैं अपना फ्री हाथ पीछे की तरफ ले गयी और उसकी जींस का बटन खोल दिया। फिर उसकी चैन नीचे करके उसके अंतवस्त्र में हाथ डाल दिया।
मेरा हाथ उसके कड़क अंग को छू गया। मैंने उसको पकड़ा और अपने हाथ से उसको ऊपर नीचे रगड़ने लगी। उसको तो जैसे करंट लगा। उसके होठ मेरी गर्दन और कंधो को चूमने लगे।
मैंने अपना हाथ बाहर निकाल कर उसकी जीन्स को नीचे खींचने लगी, पर हाथ पीछे होने से इतना जोर नहीं लगा पाई। उसने मेरे वक्षो को छोड़ा और मेरी मदद के लिए अपने अंतवस्त्र सहित जींस नीचे खिसका दी। उसका लंड अब जींस के बंधन से मुक्त हो गया था, और मेरे तैयार होंने के संकेत भी मिल गए।
अब उसने मेरी केपरी के बटन और चैन खोल दी और नीचे खिसका कर घुटनो तक ले गया। उसके बाद मैंने …