रंजन की वापसी पर मेरी चुदाई तो फिर से शुरू हो गी गयी है, आप इस चुदाई स्टोरी पढ़िए और मजे करिए..
सुहागरात की अगली सुबह मेरी आँख तब खुली जब रंजन मुझ पर चढ़ कर मुझे चोदने में लगा था. मेरी पहली नजर आस पास गयी अशोक को ढँढ़ते हुए, पर वो कही नजर नहीं आया. मैंने अपने हाथों से रंजन को पीठ पर मारते हुए रोकने की कोशिश की.
मैं: “उतर, छोड़ अशोक आ जायेगा.”
रंजन: “अरे घबराओ मत, तुम एक दिन के लिए मेरी बीवी हो. मुझे तुम्हे चोदने से कोई नहीं रोकेगा.”
वो मुझे खिसकाता हुआ पलंग के कोने तक ले आया और मेरा सर पलंग के साइड से लटक सा गया. अब उसने मुझे चार-चार सेकंड के अंतराल से एक एक बहुत गहरा झटका चूत के अंदर मारना शुरू किया.
थोड़ा पानी तो उसका बनने ही लगा था और थपाक की एक जोर की आवाज के साथ वो झटके मार रहा था.
उसके जोर के गहरे झटके के आगे मैं कराहने के अलावा कुछ ना कर सकी. हर चार सेकंड में एक झटका और उसके बाद मेरी एक आहह्ह्ह..
बाथरूम से फ्लश की आवाज आयी और मैं घबरा गयी कि अशोक आने वाला हैं, पर रंजन ने मुझे बिस्तर से लटका के रखा था और मैं उसके झटके के अलावा हिल भी नहीं पा रही थी.
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