इस देसी चुदाई कहानी के पिछले एपिसोड में अपने जाना, की हमारा पुराना पड़ोसी मेरे घर होली खेलने आ गया जब मैं घर पर अकेली थी. उसी का फायदा उठा कर उसने बाथरूम में मेरे जिस्म के मजे लिए, अब आगे..
मैंने टॉवल उठाया अपने बदन को पोंछ गीले कपड़े निकाल दिए. बाथरूम के अंदर पहनने के कोई कपड़े थे नहीं तो मेरे मम्मो से लेकर जांघो तक मैं टॉवल लपेट कर ही बाहर आयी.
नितिन की इन हरकतों की वजह से मेरे हाथ पैर अभी भी कांप रहे थे, और मेरे शरीर पर मैं उसके स्पर्श महसूस कर पा रही थी, ख़ास तौर से जब उसने मेरे मम्मो पर साबुन मला था.
मैं जैसे ही टॉवेल लपेट बाहर आयी सामने थोड़ी दूर नितिन खड़ा हो कुछ खा रहा था. हम दोनों की नज़रे मिली और वो मुस्कराने लगा.
नितिन: “अरे तुमने तो आज होली खेली ही नहीं, देखो कोई रंग ही नहीं लगा.”
वो मेरी तरफ बढ़ता उससे पहले ही मैं चीखते हुए बैडरूम की तरफ भागी और वो मेरे पीछे. मैं बैडरूम का दरवाजा पूरा बंद करती उसके पहले ही वो दरवाजे पर आ गया और बंद नहीं करने दिया.
मैं: “कपड़े पहनने दो, फिर रंग लगा देना, अभी दरवाजा बंद करने दो. जाओ.”
नितिन: “पिछली होली पर भी यही बोलकर कमरे में बंद हो गयी थी. कपड़े बदलने हैं तो मेरे सामने बदलो और फिर होली खेलो.”
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