This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनील का धीरज अब जवाब देने लगा था। अब वह ज्योति को पूरी तरह अनावृत (याने नग्न रूप में) देखना चाहते थे। सुनील ने ज्योति की कमर पर लटका हुआ उनका कॉस्च्यूम और निचे, ज्योति के पॉंव की और खिसकाया।
ज्योति ने भी अपने पाँव बारी बारी से उठाकर उस कॉस्च्यूम को पाँव के निचे खिसका कर झुक कर उसे उठा लिया और किनारे पर फेंक दिया। अब ज्योति छाती तक गहरे पानी में पूरी तरह नंगी खड़ी थी।
ना चाहते हुए भी सुनील नग्न ज्योति की खूबसूरती की नंगी सुनीता से तुलना करने से अपने आपको रोक ना सका। हलांकि सुनीता भी बलाकि खूबसूरत थी और नंगी सुनीता कमाल की सुन्दर और सेक्सी थी, पर ज्योति में कुछ ऐसी कशिश थी जो अतुलनीय थी। हर मर्द को अपनी बीबी से दूसरे की बीबी हमेशा ज्यादा ही सुन्दर लगती है।
सुनील ने नंगी ज्योति को घुमा कर अपनी बाँहों में आसानी से उठा लिया। हलकीफुलकी ज्योति को पानी में से उठाकर सुनील पानी के बाहर आये और किनारे रेत के बिस्तर में उसे लिटा कर सुनील उसके पास बैठ गए और रेत पर लेटी हुई नग्न ज्योति के बदन को ऐसे प्यार और दुलार से देखने लगे जैसे कई जन्मों से कोई आशिक अपनी माशूका को पहली बार नंगी देख रहा हो।
ऐसे अपने पुरे बदन को घूरते हुए देख ज्योति शर्मायी और उसने सुनीलकी ठुड्डी अपनी उँगलियों में पकड़ कर पूछा, “ओये! क्या देख रहे हो? इससे पहले किसी नंगी औरत को देखा नहीं क्या? क्या सुनीता ने तुम्हें भी अपना पूरा नंगा बदन दिखाया नहीं?”
ज्योति की बात सुनकर सुनील सकपका गए और बोले, “ऐसी कोई बात नहीं, पर ज्योति तुम्हारी सुंदरता कमाल है। अब मैं समझ सकता हूँ की …