This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
दोनों कमरे पूरी तरह प्रकाशित थे। सुनील ज्योति और जस्सूजी को अच्छी तरह प्यार करते हुए देख सकते थे। जस्सूजी ने ज्योति के कानों में कुछ कहा। यह सुनकर ज्योति कुछ मुस्कुरायी और उसने शरारत भरी नज़रों से सुनील की और अपना सर घुमा कर देखा।
फिर अपनी हथेली को किस कर ज्योति ने एक फूंक मार कर जैसे उस किस को सुनीलजी की दिशा में फेंकने का इशारा किया और अपने पति जस्सूजी के निचे लेटी हुई ज्योति अपने पति जस्सूजी के पयजामे में हाथ डाल कर उनका लण्ड एक हाथ में पकड़ उसे सहलाने लगी।
सुनीता के साथ दिन में हुए कई निजी सम्पर्कों की वजह से जस्सूजी काफी उत्तेजित थे। ज्योति का हाथ लगते ही जस्सूजी का लण्ड खड़ा होने लगा। ज्योति के थोड़े से हिलाने पर ही उसने अपना पूरा लंबा और मोटा आकार धारण कर लिया।
ज्योति ने फ़टाफ़ट जस्सूजी के पाजामे का नाडा खोला और अपने पति के लण्ड को आज़ाद कर उस को लण्ड प्यार से हिलाने और सहलाने लगी। जस्सूजी ने सुनीलजी की नज़रों के परवाह किए बगैर ज्योति के छाती के आगे वाली ज़िप खोल दी और ज्योति ने उन्मत्त स्तनोँ को दोनों हाथों की हथेलियाँ फैलाकर उनसे खेलने लगे।
जस्सूजी और उनकी बीबी ज्योति की उनके पलंग पर हो रही …