This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनीता ने अपने पति को झाड़ तो दिया पर उनकी बातें सुनकर वह बहुत गरम हो गयी थी। उसकी चूत में से रस चू ने लगा था। वह जस्सूजी से तो चुदवा नहीं सकती थी पर अपने पति से जरूर चुदवा सकती थी। पति की उकसाने वाली बातें सुनकर उसकी चुदवाने की इच्छा तेज हो गयी। सुनीलजी तो अपना लोहे की छड़ जैसा लण्ड लेकर तैयार ही थे।
तब अचानक ही सुनीता को ज्योतिजी के कराहने की आवाज सुनाई दी। सुनीता ने ना चाहते हुए भी जस्सूजी और ज्योति के कमरे की और मुड़कर देखा तो पाया की जस्सूजी दोनों घुटनों पर बैठ कर अपनी बीबी ज्योतिजी पर सवार हुए थे और अपना मोटा लंबा लौड़ा बेचारी ज्योतिजीकी छोटी सी चूत में पेले जा रहे थे।
सुनीता जस्सूजी और ज्योतिजी की चुदाई देखती ही रह गयी। चाहते हुए भी वह अपनी नजर वहाँ से हटा नहीं सकी। जस्सूजी का जोश और जस्सूजी के चिकने प्रकाश में चमकते हुए लण्ड को ज्योतिजी की रस से लथपथ चूत में से अंदर बहार होते हुए देख सुनीता पर जैसे कोई तांत्रिक सम्मोहिनी का वशीकरण किया गया हो वैसे सुनीता एकटक ज्योतिजी और जस्सूजी की खुल्लमखुल्ला चुदाई देखने लगी। वह भूल गयी की उसका पति का फुला हुआ चिकना लण्ड उसकी हथेली में फर्राटे मार रहा था।
वैसे तो सुनीलजी ने चुदाई के कुछ अश्लील वीडियोस सुनीता को दिखाए थे। पर यह पहली बार था की सुनीता कोई मर्द और औरत लाइव चुदाई देख रही थी। उन वीडियो को देख कर सुनीता को इतनी उत्तेजना महसूस नहीं हुई थी जितनी उस समय उसकी दीदी की सुनीता के अपने गुरु और …