This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
अगले दिन दोपहर बाद ऑफिस में काम करते वक्त मुझे जैक का फ़ोन आया कि वो बाहर पार्किंग में मेरा इंतजार कर रहा हैं। मैंने उसे कहा मैं अभी आती हूँ। मैंने सोचा राहुल को बोलूंगी तो वो मुझे फिर भाषण सुना देगा। मैंने अपनी तबियत ख़राब होने का बहाना बना राहुल से छुट्टी ली और जैक के पास आ गयी।
जैक: “चलो हम गेस्ट हाउस चलते हैं ”
मैं: “नहीं, वो लोग फिर से आ गए तो।”
जैक: “तो क्या करे, तुम्हारे पास कोई ओर जगह हैं? ”
मैं: “हम लोग मेरे घर जा सकते हैं, यहाँ पास ही में हैं। इस वक्त वहा कोई नहीं होता हैं । ”
मैं और जैक मेरे घर पर आ गए। आज हमें जोसफ का कोई खतरा नहीं था। मैंने उसे कल के जोसफ और सैंड्रा के वीडियो के बारे में बता दिया। वो मेरी चतुराई पर हंसने लगा।
मैं उसे अपने बैडरूम में ले आयी। इतना खूबसूरत लड़का पहली बार मेरे बैडरूम में आया था। मैं उसके चेहरे को ही निहार रही थी। उसकी नीली आँखें मुझे बुला रही थी। मैं उसके नजदीक आ गयी।
मैंने आगे बढ़ उसके हलके गुलाबी होंठो को अपने लाल रंगे होंठो में भर लिए। वो भी मेरे होंठो को चूसने लगा। उसने चूमते चूमते ही मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और शर्ट को मेरे कंधे से बाहर कर पूरा हाथों से निकाल …