This story is part of the Pooja Ki Pooja series
क्या सुन्दर उभरे दिखते हैं दूध भरे यह वक्ष तुम्हारे जोजब हाथ हमारे मसलेँगे तब हाल तुम्हारा क्या होगा?यह बॉल बड़े चिकने कोमल कैसी होंगी उनपर निप्पल?उड़ गए होश स्तन को निहार, जब होँठ चूमेंगे क्या होगा?
साडी में लिपटी है तेरी यह गाँड़ सुहानी मतवारीउसके गालों के बिच दिखे दरार तेरी दैय्या भारीचूत भी हलकी सी उभर रही जाँघों बिच मधुर रसीली सीजब डालेंगे लौड़ा उसमें तब हाल तुम्हारा क्या होगा?
दो साल नौकरी करने के बाद मैं उन दिनों मैं मुंबई में अच्छा खासा अपना निजी काम कर रहा था। मैं अपने ही बलबूते पर छोटी मोटी फिल्मों में आर्ट डायरेक्शन कर रहा था और कुछ एड फ़िल्में भी बनाता था। ठीक ठाक कमाई करने के बाद मैंने एक अच्छी सोसाइटी में किराए पर फ्लैट भी ले रखा था।
काफी अच्छा बिल्डिंग काम्प्लेक्स में पांचवी मंजिल पर रहता था। मेरी पत्नी नीना भी एक स्कूल में नर्सरी क्लासेज पढ़ाती थी। हमारा एक बेटा चार साल का था उसे साथ स्कूल ले जाती और वापस ले आती। चंद सालों …