This story is part of the Pooja Ki Pooja series
मैंने फूल सी कोमल और हलकी नंगी पूजा को अपनी बाहों में उठाकर धीरे से पलंग पर लिटा दिया। उसके पाँव चौड़े कर मैंने उसे पलंग के एक छोर पर पूजा की गाँड़ टिका कर उसके पाँव निचे लटकाने को बाध्य किया।
पूजा की सुआकार सही मात्रा में माँसल कमल की नाल की तरह पतली जाँघों को काफी और चौड़ा कर मैंने अपना मुंह उस खाई में घुसाया और पूजा की रस रिसती हुई चूत में अपनी जीभ डाल कर मैं उसके रस को चाटने लगा।
मेरी जिह्वा को अपनी चूत में स्पर्श को अनुभव करते ही पूजा एकदम काँप उठी। उसके पुरे बदन में एक सरसराहट सी फ़ैल गयी। मैंने अनुभव किया की उसकी चूत में से उसके पानी के स्राव अचानक बढ़ गया। मेरा अपना भी तो हाल बुरा था।
मेरा लण्ड भी तो पूरा फूल कर लोहे की छड़ के समान पूरा लंबा और मोटा पूजा की चूत में घुसने के लिए फनफना रहा था। मेरे लण्ड में से भी तो पूर्व रस रिस रहा था। मैं एक हाथ में अपना लण्ड सम्हाले हुए दूसरे हाथ से अपना संतुलन बनाये रखे पूजा की चूत में अपनी जीभ डाल कर उसकी चूत को कुरेदने लगा।
कुछ देर तक मैं पूजा की चूत को चाटता रहा और पूजा पलंग पर अपनी गाँड़ को मचलती हुई बिना कुछ बोले मुझे अपना लण्ड उसकी चूत में डालने का इशारा करती रही। आखिर में पूजा से रहा नहीं गया। मर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ कर पूजा अचानक चिल्लाई, “अरे साले यह क्या तू मेरी चूत चाटने को लगा हुआ …