Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 74 (Last Episode)
February 3, 2025Last Updated: February 3, 2025
0 354 8 minutes read
This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
क्या खूब सुहाना सफर रहा क्या सुबह हुई क्या शाम ढली। धीरे धीरे किसी की औरत मैंने कैसे अपनी करली।जो फिरती थी मानिनी बन कर उसको मैंने पकड़ा कैसे? जाँ का भी दाँव लगा कर के बाँहों में उसे जकड़ा कैसे?
जो प्यार किसी से करते हैं वह मौत से कभी नहीं डरते हैं। जब मौत से वह बच जाती है तो खुद चल कर चुदवाती है।
सुनीता के बड़े प्यार और दुलार से जस्सूजी का लण्ड एक हाथ में पकड़ कर सहलाना और साथ साथ में मुंह में जीभ को हिलाते हुए लण्ड को अपने मुंह की लार से सराबोर करते हुए चूसवाने का अनुभव महसूस कर जस्सूजी खड़े खड़े आँखें मूँद कर मजे ले रहे थे।
कुछ ही पलों में जस्सूजी का बदन जैसे ऐंठ सा गया। उनकी छाती की पसलियां सख्त हो गयीं और वह मचलने लगे। इतनी बार सुनीता की चुदाई करते हुए झड़ ने के बाद भी जस्सूजी एक बार फिर अपना वीर्य सुनीता के मुंह या हाथ में छोड़ने के लिए तैयार हो रहे थे।
सुनीता ने यह महसूस किया और फुर्ती से जस्सूजी का लण्ड हिलाने और बड़े प्यार से चूसने लगी। जस्सूजी का सख्त बदन कुछ अजीब सा रोमांचित होते हुए हलके से झटके खाने लगा।
सुनीता ने जब लण्ड को …