This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
हेल्लो दोस्तों, अब आगे की कहानी पढ़िए!
अर्जुन ने महसूस किया की उस दोपहर के बाद शायद कालिया का भी ह्रदय परिवर्तन होने लगा था। अब वह पहले की तरह बातबात में गुंडा गर्दी पर नहीं उतर आता था। अर्जुन ने भी कालिया का साथ दिया और धीरे धीरे कालिया और अर्जुन की दोस्ती पक्की हो गयी।
अर्जुन से मिलने के लिए अक्सर कालिया अर्जुन के चाचाजी की दूकान पर वैसे ही आने लगा। जब मौक़ा मिलता तब कालिया और अर्जुन बैठ कर ताश खेलते या इधरउधर की बातें करते। कालिया ने आहिस्ते आहिस्ते अर्जुन के करीब आकर उसे उकसाना शुरू किया।
कालिया में आया हुआ बदलाव देख कर अर्जुन के चाचा सबसे ज्यादा खुश हुए, क्यूंकि उन्होंने देखा की कालिया जो सामान की मार्किट में किल्लत होती थी वह सामान चाचा जी की दूकान पर सबसे पहले और ज्यादा तादाद में पहुंचा देता था। इससे चाचाजी की सेल भी बढ़ने लगी।
ऐसे ही एक दिन जब कालिया अर्जुन से दूकान पर बातें कर रहा था तब सिम्मी अचानक घर से आ पहुंची। कालिया को देख कर सिम्मी कुछ सकपका सी गयी। अर्जुन ने …