This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
पाठक गण, अगर कहानी ठीक लगी हो तो जरूर कमैंट्स लिखे!
उस तगड़े मोटे लण्ड से अब आज मुझे चुदवाना हैहाय मेरी माँ बचने को चलना नहीं कोई बहाना है।एक बार चुदवा लुंगी तो नशा मुझे हो जाएगा।फिर छोटे मोटे लण्ड से मुझे चुदने का लुत्फ़ न आएगा।
रमेशजी को इस तरह अपने स्तनों से खेलते हुए महसूस कर आरती अपने आपको सम्हाल नहीं पा रही थी। उसके पुरे बदन में काम की ज्वाला भड़क रही थी। जितनी कामाग्नि रमेशजी के बदन में भड़क रही थी, शायद उससे कहीं ज्यादा आग आरती के बदन में भड़क रही थी। उस रात तक उसने वह आग को काफी कुछ नियत्रण में रखा हुआ था।
लोक लाज और संबंधों की मर्यादा से दबी हुई आरती की वह कामाग्नि एक छोटे से कैनिस्टर में जबरदस्त ताकत से दबा कर बंद किये हुए बारूद सी विस्फोट होए के कगार पर थी। पर अब रमेशजी जैसे तगड़े मर्द से चुदाई करवाने की घडी …