This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
जिंदगी प्यार की दो चार घडी होती है चाहे छोटी भी हो यह उमर बड़ी होती है।कड़ी चुदाई हो तेरी अगर मोहब्बत से आखिरी लम्हें तक वह याद खड़ी होती है।
आरती अपने कूल्हे हिला कर अपनी उत्तेजना को सम्हालने की कोशिश कर रही थी। आरती के मुंह से जिस तरह “आह…… ओह…… हाय्यय….”
इत्यादि सिसकारियां निकल रहीं थीं, मुझे ज़रा भी शक नहीं था की आरती चुदाई होने के पहले ही झड़ने लगेगी। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। रमेश की उँगलियों के चोदन से पगलाई आरती ने एक गहरी साँस ली और पलंग पर ढेर बन कर शांत हो गयी।
आरती पहली बार उस रात को झड़ गयी। रमेशजी भी आरती को झड़ते हुए देख थोड़ी देर उंगली चोदन कर फिर उन्होंने आरती की चूत में से अपनी उंगलियां हटा दीं।
आरती को आखिर में तो स्विकारना ही था की रमेशजी उसकी चूत तगड़ी तरह से चोदेंगे ही और आरती खुद भी चाहती थी की रमेशजी उसे अच्छी तरह से चोदे।
पर फिर भी जैसे मरीज को डॉक्टर की सुई का डर होता है, हालांकि वह जानता है की उसे सुई …