This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
जब हवस दिमाग पे हावी हो तो तरिका तौर नहीं होता,बस लण्ड और चूत ही होती है, बाकी कुछ और नहीं होता।लण्ड तगड़ा हो चूत हो राजी दिन रात चुदाई होती है,फिर चूत सूजे या पाँव डुले उस पर कोई गौर नहीं होता।
रमेशजी ने पीछे से अपने हाथ लंबा कर दोनों हाथों से आरती के दोनों स्तनोँ को कस के पकड़ा और उन्हें जोर से मसलते और दबाते हुए एक हल्का धक्का मार कर अपना तगड़ा लण्ड आरती की चूत में कुछ गहराई तक घुसाया।
कुछ पल के लिए आरती को चक्कर सा आ गया। पर आरती ने रमेशजी को इसकी कोई भी भनक नहीं पड़ने दी। बल्कि आरती ने रमेशजी को चुनौती देते हुए कहा, “चोदिये रमेशजी, मुझे पुरे जोश से चोदिये। अब मैं तैयार हूँ। अब मुझे आपके रहम की कोई जरुरत नहीं है।”
बस रमेश को और क्या चाहिए था? अब रमेशने अपना पेंडू पीछे किया और अपनी गाँड़ से लेकर अपने पुरे बदन से एक जोर से धक्का मार कर अपना पूरा लण्ड आरती की चूत में पेल दिया। चूत की सुरंग में भरी हुई चिकनाहट के कारण लण्ड चूत में पूरा घुस तो गया पर आरती को तगड़े चक्कर …