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पड़ोसन बनी दुल्हन-5

This story is part of the Padosan bani dulhan series एक दिन शाम को जब मैं ऑफिस से घर पहुंचा तो दरवाजा खोलते ही टीना मुझसे लिपट गयी और जोर शोर से रोने लगी। दर असल कुछ ही देर पहले टीना के पापा का फ़ोन आया की टीना के बड़े भाई का एक गंभीर एक्सीडेंट हुआ था और वह हॉस्पिटल में एडमिट थे। उनकी हालत नाजुक थी। टीना के भाई की माली हालत कोई ख़ास ठीक नहीं थी। टीना का भाई उस समय दिल्ली से करीब ३५० किलो मीटर दूर राजस्थान में जयपुर से करीब ५० किलोमीटर दूर एक छोटे शहर में रहता था और कोई छोटीमोटी नौकरी करता था। वहाँ जाने के लिए कोई सीधी ट्रैन नहीं थी। हमारी पुरानी कार उतनी दुरी उन रास्तों पर बिना दिक्कत तय कर पाएगी उसका भरोसा मुझे नहीं था। हमने फ़ौरन तय किया की हम सराई कालेखां बस अड्डा चलेंगे और जो भी बस मिल जायेगी वह पकड़ कर टीना के भाई के पास सुबह तक पहुंचेंगे। टीना ने सुषमा जी को यह समाचार दे दिया और कहा की हम कुछ दिनों के लिए जा रहे थे और घर की चाभी उनको दे कर जाएंगे। अगर वापस आने में देर हुई तो एकाद हफ्ते बाद घर की साफ़ सफाई करवा देना। सुषमा ने जब सेठी साहब को बताया तो फ़ौरन वह दोनों हमारे घर पहुंचे। मुझसे पूरी हकीकत समझने के बाद सेठी साहब ने मुझे पांच मिनट रुकने को कहा। सेठी साहब और सुषमा अपने फ्लैट में गए। उन्हें गए हुए मुश्किल से पंद्रह मिनट लगे होंगे की सेठी साहब वापस आ गए। आते ही सेठी साहब ने कहा, “तुम्हें बस में जाने की कोई जरुरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ मेरी टोयोटा कार भेज रहा हूँ। तुम्हें कार चलाने के भी जरुरत नहीं। मैं मेरे ड्राइवर को भी तुम्हारे साथ भेज रहा हूँ। वह कार चला लेगा। तुम अपनी कार मुझे दे दो। मैं दिल्ली में ऑफिस जाने के लिए तुम्हारी कार यूज़ कर लूंगा।” मैं कुछ आगे बोलता इसके पहले सेठी साहब ने मुझे एक तरफ ले जा कर कहा, …

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