आपने अब तक की मेरी इस सेक्स कहानी के पहले भागपुराने साथी के साथ सेक्स-1में पढ़ा कि मेरे बचपन के साथी सुरेश ने मुझसे अपने दिल की बात साझा करते हुए बताया था कि वो मुझसे प्यार करता था. इसी क्रम में मैंने उसे फोन पर शाम को घर आने के लिए कहा.
अब आगे:
शाम वो करीब 7 बजे आया, हम चाय पीते हुए बात करने लगे और 8 बज गए.
अब रात हो चुकी थी, तो मैंने उससे खाने के लिए भी पूछ लिया और रात 9 बजे तक मैंने खाना बना लिया. खाते पीते और बातें करते 10 बज गए और फिर पता नहीं, वो बात घुमा फिरा कर अपनी बीवी और अकेलेपन की बात करने लगा.
मुझे उसकी बातों पर थोड़ा संदेह होने लगा और फिर मैं बहाने बनाने लगी ताकि वो मेरे घर से चला जाए. पर वो हिलने का नाम नहीं ले रहा था और मेरा डर और उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी.
किसी तरह वो जाने को राजी हुआ, तो मेरी जान में जान आयी.वो मुझे जाने को बोल कर बाहर की ओर बढ़ने लगा. तब मैं भी उसके पीछे जाने लगी कि उसके जाते ही मैं दरवाजा बंद कर दूँ.
अभी वो दरवाजे के पास ही पहुंचा था कि अचानक से वो मेरी तरफ पलट गया. मैं एकदम से चौंक गयी, पर मैं जब तक कुछ समझ पाती कि उसने झट से मुझे पकड़ कर अपनी बांहों में भर लिया.
मैं उसके विरोध में चिल्लाती कि उसने अपने होंठों से मेरे मुँह को बंद कर दिया. मैं एक पल के लिए भौचक्की रह गई, पर अगले ही पल उससे दूर होने के लिए संघर्ष करने लगी. उधर उसने अपनी पूरी ताकत से एक हाथ से मुझे पकड़ रखा था, दूसरे हाथ से मेरे बालों को.
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