कॉलेज में मेरी बहुत लड़कियाँ दोस्त थी पर गर्लफ़्रेंड एक भी नहीं थी. मैं दोस्ती में ज्यादा विश्वास रखता हूँ, बेबजह प्यार के झमेलों में नहीं. एक दोस्त लड़की के साथ मैं घूमने गया तो …
मेरा नाम आदित्य है. यह कहानी उस वक़्त की है जब मैं इंदौर से बी.ई. के चौथे साल की पढ़ाई कर रहा था।
कॉलेज में वैसे तो मेरी बहुत लड़कियाँ दोस्त थी पर गर्लफ़्रेंड एक भी नहीं थी. या ये कह लो मुझे बनानी नहीं थी. मैं दोस्ती में ज्यादा विश्वास रखता हूँ, बेबजह प्यार के झमेलों में नहीं.
मैं यह कहानी मुख्यतः उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ जो लोग समझते हैं कि एक लड़का और एक लड़की सिर्फ दोस्त नहीं हो सकते. इस कहानी के अंत में आप खुद ही समझ जायेंगे कि अगर इतना सब होने के बाद भी हम लोग दोस्त रह सकते हैं तो फिर बिना कुछ हुए तो रहा ही जा सकता है.
तो सबसे पहले मैं कहानी के नायक यानि मैं, के बारे में बता देता हूँ। मैं 5’4″ लम्बा और गोरे रंग का हूँ पर थोड़ा पतला (उस समय) लड़का हूँ।
मेरी लम्बाई ज्यादा नहीं है, पर मेरा स्वभाव अच्छा है और मुझे लड़कियों से बातें करना आता है, जो …