मस्तराम कहानी सेक्स की में पढ़ें कि मैं होली वाले दिन ससुराल में था, मेरी बीवी ट्रेनिंग पर लन्दन गयी हुई थी. मेरी सास ने मुझे भांग पिलायी और मेरे साथ …
एक बेडरूम, जिसमें डबल बेड पर एक 28-30 साल का जवान मर्द हाफपैन्ट में सो रहा है. बाहर से अचानक ‘होली है … होली है …’ की आवाजें आने लगीं.
वो मर्द उठकर बाहर देखने के लिए उठ गया.
उसके घर के आंगन में एक लंबी और गोरी लगभग 45 साल की औरत सफेद साड़ी और ब्लाउज में खड़ी थी. वो सुंदर स्त्री अपनी उम्र के हिसाब से बहुत फिट थी. उसके साथ ही लगभग उसी की उम्र की एक और औरत भी थी. ये वाली महिला पहली वाली से कुछ कम सुंदर और सांवली सी थी और घाघरा चोली में खड़ी थी. इन दोनों के पीछे शायद मोहल्ले की दो और नीचे तबके की औरतें खड़ी थीं.
मोहल्ले की एक औरत ने उस मर्द को देखा और बोल उठी- लो वो देखो, जंवाई बाबू भी उठ गए.
जवान मर्द अलसाई सी आवाज में अपनी नंगी छाती को फैलाता हुआ एक मस्त अंगड़ाई लेते हुए बोला- ये क्या हो रहा है यार … आप लोग तो मुझे सोने भी नहीं दे रहे हो.
सफेद साड़ी वाली औरत मुस्कुरा कर बोली- आज होली है सुंदर … साल में एक बार ही ये त्यौहार आता है. ये लोग अपना शगुन लेने आई हैं. अब आप ही अपने हाथों से इन्हें इनका शगुन दे दीजिए.
घाघरा चोली वाली औरत चहक कर बोली- हां रत्ना दीदी, …