शीतल आज बहुत परेशान रही। उसने आज वीर्य के साथ कुछ नहीं किया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी पैंटी पे वीर्य उसका मकान मालिक वसंत चाचा गिरा रहा था। शीतल के दिमाग में पिछले 6 महीने के सारे दृश्य आँखों के सामने से गुजर रहा था और उसे एक भी वाकया ऐसा याद नहीं आया जब उसने वसंत को खुद को घूरते पाया हो या उसमे इंटरेस्ट लेते देखा जो। और बाँकी सारे लोग उससे बात करना चाहते थे, उसे घूरते थे, उसके बदन के उतार चढ़ाव को देखते थे, लेकिन वसंत चाचा ने कभी ऐसी कोई हरकत की हो, शीतल को ये याद नहीं था।
विकास के ऑफिस का पियोन मक़सूद उसे बुरी तरह घूरता था। शीतल उस दिन को याद कर रही थी जिस दिन शीतल पहली बार यहाँ आयी थी और उसका सामान शिफ्ट हो रहा था, तो मक़सूद को विकास ने यहीं बुला लिया था मदद करने के लिए। मक़सूद ऐसे उसके बदन को निहार रहा था कि शीतल का बदन हिल गया था और उसकी आँखों में शीतल खुद को नंगी महसूस कर रही थी। उसके बाद भी जब जब …