मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालो को आखिरी स्वरुप दे रही थी की तभी सासु माँ की आवाज़ आयी की तैयार हुई की नहीं, सब लोग आ चुके होंगे ज्यादा देर नहीं करते अब।
मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली हो गया बस और कमरे से बाहर निकल गयी। सासु जी तैयार थे पडोसी के यहाँ एक रात्री जागरण में जाने के लिए। मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।
सासु जी कुछ बोलते हुए चल रहे थे पर में किन्ही और ख्यालो में थी, पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।
दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे, अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चूका था। एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगो के लिए व्यवस्था थी।
वहाँ की मेरी भाभी सहेलिया दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ, इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरते बैठी बातों में मशगूल थी, हमारे आते हैं उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए। कुछ औरते बातों में मग्न थी कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी। पता चला पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला हैं।
मैं अपने पुराने दिनों और विचारो में खो गयी और मध्य रात्रि होने वाली थी, अब तक सारी औरते और पुरुष सो चुके थे। शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में, मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी। मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतो के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।
तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था। एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र। जब भी किसी फंक्शन में जाता अपनी बातों से वह शमा बाँध लेता। मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।
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