This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
शायद आज के दिन उसका मूड सचमुच अलग होगा। मेरा काम हो ही जायेगा। राहुल ने सबका पार्टी में आने का धन्यवाद दे स्वागत किया और अपनी दो मिनट के भाषण के बाद सबको पार्टी एन्जॉय करने को बोल दिया। तेज संगीत एक बार फिर से चलने लगा और लोग एक बार फिर अपने अपने मजे लेने में लग गए।
मैं एक मौके की तलाश में लग गयी कि मैं राहुल के सामने आउ और उसे मेरी तारीफ़ करने का अवसर दे पाऊ। कुछ सहकर्मी उसे अपनी फॅमिली से मिलवा रहे थे और मैं दूर से उसे देख इंतज़ार करती रही। थोड़ी देर में शायद उसका मोबाइल बजा और वो पार्टी हॉल के दरवाजे से बाहर निकल गया।
शायद मेरे लिए ये ही मौका था उसको भीड़ से दूर अकेले मिलने का। मैं भी उसी दरवाजे से हो बाहर निकली। वो गलियारे से होता हुआ बालकनी में चला गया और फ़ोन पर बात कर रहा था। मैं उसके फ़ोन बंद होने का इंतज़ार करने लगी अपनी साड़ी एडजस्ट करती रही जैसा कि मैंने प्लान किया था।
मैंने देखा उसने फ़ोन जेब में रख …