मेरे गणित शिक्षक के सुझाव पर पिताजी ने अवकाश के दिनों में मुझे शिक्षक के घर भेज देने का मन बना लिया. वहां पर मेरे शिक्षक ने मुझे कैसा पाठ पढ़ाया, मेरी कहानी में पढ़ें.
मेरी पिछली गांडू स्टोरीबड़े लड़के से मेरी गांड की चुदाई कहानीमें आपने पढ़ा था कि कैसे सेक्सी किताबों के लालच ने मेरी गांड मरवा दी थी चाहे आधी अधूरी ही सही.
उस लड़के विपिन के साथ उस अनुभव की पुनरावृत्ति तो नहीं हुई और मेरी तरफ से दोबारा पहल करने का तो कोई प्रश्न ही नहीं था क्योंकि विपिन ने समझौते के तहत मुझे पुस्तकें घर ले जाकर पढ़ने का अपना वचन जारी रखा और मैंने उस अनुभव को समझौते का एक भाग जानकर उसे पूरा किया.
जैसा मैंने पहले वर्णित किया था वो अनुभव मुझे यौन सम्बन्ध से अधिक दो व्यस्कों के मध्य कोई खेल लगा. विपिन सम्भवत: मेरे असहयोगी व्यवहार से या लिंग को प्रविष्ट न कर पाने की विफलता से निराश था, किन्तु फिर भी हमारे बीच का समझौता जारी था. इसके अलावा यह भी हो सकता है कि उसे कोई और बेहतर विकल्प मिल गया था.
समय चक्र अपनी गति से गतिमान था, मेरी ऊंचाई बढ़कर 5.6 फीट हो गई थी. परिवार चिंतित था मेरी लम्बाई पिछले 3 वर्षो में केवल 2 इंच ही बढ़ी थी जो कि उचित दर से नहीं बढ़ रही थी. अब मैं आर्ट्स कॉलेज के द्वितीय वर्ष में प्रवेश कर चुका था. मैं पढ़ने में औसत से अधिक था किन्तु सर्वश्रेष्ठ छात्रों से 19 ही था.
मेरे पिता इस बात से चिंतित थे कि प्रतिभावान होते हुए भी मैं परीक्षा में सर्वश्रेष्ठता की दौड़ में भाग नहीं लेता था. मैं अंगेज़ी की कहावत ‘जैक ऑफ आल, मास्टर ऑफ नन’ को चरितार्थ करता था. मैं खेल-कूद, नाट्य, सामान्य ज्ञान, कुश्ती, साइकल से भ्रमण करने को भी उसी संजीदगी से लेता था जैसे अपनी शिक्षा को. गणित को छोड़ मैं सभी विषयों में आत्मनिर्भर …