अभी तक इस सेक्स कहानी के पहले भागखेल वही भूमिका नयी-1में आपने पढ़ा कि मेरी सखी रमा ने मुझे एक नेता के सामने वेश्या बना कर पेश कर दिया. अब वो नेता मेरे साथ कमरे में एकांत में मजा करना चाहता था.अब आगे:
मैं भीतर गई, तो नेताजी बिस्तर पर लेटे हुए थे. मुझे आते देख बोले- आ जा, इधर बैठ बगल में.
मैं उसकी बेइज्जती भारी बातें दरकिनार करती हुई मुख पर बनावटी हँसी दिखाते हुए उसके बगल बैठ गई.
उसने मेरे हाथ से पैग लेते हुए बोला- मस्त है तू तो, कभी पहले नहीं दिखी, बाहर से आई है क्या?मैंने भी हां कहते हुए बोला- उत्तरप्रदेश से आई हूं.इतना सुनने के बाद वो अपने पजामे के ऊपर लिंग को हाथ से सहलाते हुए बोला- चल थोड़ा तैयार कर … बहुत दिन हो गए है मुझे.
मैंने मुस्कुराते हुए उसके पजामे का नाड़ा खोल कर उसके जांघिये को नीचे सरका दिया. उसका लिंग किसी मांस के लोथड़े सा बिल्कुल ढीला ढाला बेजान सा पड़ा था. नेता 60 साल से ऊपर का ही होगा, पर लिंग सामान्य मर्दों की ही तरह बालों से भरा पड़ा था.
मैंने उसके लिंग को हाथ से हिलाना डुलाना शुरू किया, तो थोड़ा थोड़ा सख्त होने लगा.
नेताजी लगभग आधा गिलास खाली करने के बाद बोले- मुँह से चूसती नहीं है क्या … थोड़ा मुँह तो लगा.
उसकी बात सुन अपने किरदार के हिसाब से हंसती हुई मैं उसके लिंग को मुँह में भर चूसने लगी. मुझे उस आदमी को ये भी जताना था कि ये सब मेरे लिए रोज का काम है. मैं उसके लिंग के सुपारे को खोल चूसने लगी और एक हाथ से उसके अण्डकोषों को दबाने ओर सहलाने लगी.
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