मुझे ऑफिस के बाहर अचानक एक ऐसी लड़की दिख गयी, जिसे देखने के बाद सब कुछ जैसे रुक सा गया. उस मासूम सी परी को पाने के लिए मैं बेचैन हो गया. वो मुझे मिली क्या?
इश्क़ वासना को एक नया रंग देता है.इश्क के साये में वासना से भरी निगाहें भी खूबसूरत हो जाती हैं.एक एक स्पर्श प्यार की मिठास से भर जाती है.इश्क़ और वासना में सहमति और असहमति का फ़र्क़ है.
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र 28 साल की है और ये दास्तान हैं एक मोहब्बत की … जिसमें वासना तो है, लेकिन प्यार में लिपटा हुआ रंग है.
ये बात आज से कुछ 6 महीने पहले की है. मुझे अचानक से अपने ऑफिस के बाहर एक ऐसी लड़की दिख गयी, जिसे देखने के बाद सब कुछ रुक सा गया. मेरे हाथ में लगी हुई सिगरेट गिर गयी, इसका अहसास मुझे तब हुआ, जब मैं सिगरेट पीने के लिए अपने खाली हाथ को उठा रहा था.
अचानक थोड़ी देर में वो लड़की कहीं गायब हो गयी और मैं बेचैन हो उठा. मैं ऐसे उदास हो गया, जैसे मेरा कुछ अपना खो गया हो. वो तो आंखों ओझल हो गई थी, लेकिन मैं उसकी याद में ठगा सा खड़ा था. मेरा पूरा दिन उसकी याद में ही गुजरा, जैसे अब मेरा कुछ अपना रहा है ना हो.
ये तो सच है कि वक़्त सबका बदलता है, लेकिन इतनी जल्दी वक़्त बदल जाएगा … इसका मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था. इसी ऊहापोह में नींद भी बड़ी मुश्किल में आई और नतीजा ये हुआ कि मैं अगले दिन ऑफिस …