This story is part of the Kamini ki pyaas series
ये बात उन दिनों की है जब मोबाइल फोन नहीं होते थे, लैंड लाइन फ़ोन भी किसी के घर में होते थे। जून का उमस भरा महीना चल रहा था। सरकारी कालोनी के एक घर में श्रीमती अरोड़ा गर्मी से जूझ रही थी। जून की गरमी और फिर बिजली भी चली गई। गरमी से परेशान श्रीमती अरोड़ा, जिसका पहला नाम कामिनी (बदला हुआ नाम) ने अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ फेंक दी और बिस्तर पर बैठकर पंखा झलने लगी।
कामिनी का गुलाबी ब्लाउज पसीने से पूरा भीग चुका था। उसके अगले बटन ऐसे लग रहे थे जैसे वो कामिनी के स्तनों को संभालने का पूरा प्रयास कर रहे थे। फिर भी कामिनी के दूधिया स्तनों की गहराई साफ नजर आ रही थी।
कामिनी ने अपने 40 बसंत पार कर लिये थे। मगर उसने अपना बदन खूब सम्भाल के रखा था। लम्बे बाल, 38 साइज के स्तन, कमर 31, 36 के नितंब। …